21 Feb 2026, Sat

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ी ताकत: पासपोर्ट रैंकिंग में 10 पायदान की छलांग, अब 75वें स्थान पर भारत

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वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ी ताकत: पासपोर्ट रैंकिंग में 10 पायदान की छलांग, अब 75वें स्थान पर भारत

 

 

नई दिल्ली,भारतीय नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिहाज से बड़ी राहत और गर्व की खबर सामने आई है। वर्ष 2026 की ताजा वैश्विक पासपोर्ट रैंकिंग में भारत ने उल्लेखनीय सुधार करते हुए 10 पायदान की छलांग लगाई है और अब 75वें स्थान पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष 2025 में भारत 85वें स्थान पर था, जबकि 2024 में यह 80वें स्थान पर रहा था। इस सुधार ने भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक स्वीकार्यता और विश्व मंच पर देश की बढ़ती प्रतिष्ठा को स्पष्ट रूप से दर्शाया है।

रिपोर्ट के अनुसार, अब भारतीय पासपोर्ट धारक 56 देशों में बिना पूर्व वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं। इससे न केवल भारतीय पर्यटकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि व्यापार, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार भारत की मजबूत होती कूटनीतिक रणनीति, वैश्विक साझेदारी और बढ़ती आर्थिक शक्ति का परिणाम है। हालांकि भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वर्ष 2006 में रहा था, जब भारतीय पासपोर्ट 71वें स्थान पर था, लेकिन हालिया सुधार ने भविष्य में और बेहतर रैंकिंग की संभावनाओं को मजबूत किया है।

वैश्विक रैंकिंग में सिंगापुर ने अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है। सिंगापुर का पासपोर्ट दुनिया का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट बना हुआ है, जिसके नागरिक 192 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं। इसके बाद जापान और दक्षिण कोरिया संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं, जिनके नागरिकों को 187 देशों में वीजा-मुक्त प्रवेश की सुविधा है।

तीसरे स्थान पर स्वीडन और संयुक्त अरब अमीरात का कब्जा है, जहां के नागरिक 186 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं। वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम भी शीर्ष 10 देशों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं।
पासपोर्ट की ताकत किसी भी देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा, वैश्विक विश्वास और सॉफ्ट पावर का महत्वपूर्ण संकेतक होती है। भारत की रैंकिंग में यह सुधार इस बात का प्रमाण है कि दुनिया अब भारतीय नागरिकों के लिए अपने दरवाजे पहले से अधिक तेजी और विश्वास के साथ खोल रही है।

भारतीय पासपोर्ट की यह छलांग केवल रैंकिंग में सुधार नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत, मजबूत कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव का स्पष्ट संकेत है। आने वाले वर्षों में भारत के और ऊंची रैंकिंग हासिल करने की संभावनाएं और मजबूत होती नजर आ रही हैं।