21 Feb 2026, Sat

कागज़ों में भरपूर चावल, गोदाम में सन्नाटा

खबर शेयर करें-

कागज़ों में भरपूर चावल, गोदाम में सन्नाटा

 

 

2811 कुंतल सरकारी चावल गायब, 98 लाख का नुकसान, सिस्टम सोता रहा, बाजार मुस्कुराता रहा

 

रुद्रपुर। सरकारी रिकॉर्ड में गोदाम अनाज से भरा हुआ था। हजारों कुंतल चावल, वो भी गरीबों के हिस्से का। लेकिन जब प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची, तो वहां चावल नहीं था न बोरा, न ढेर, न स्टॉक का कोई निशान। पूरा गोदाम खाली पड़ा था। यह कोई हिन्दी फिल्म का कोई सीन नहीं था, यह रुद्रपुर की स्वास्तिक राइस लैंड प्राइवेट लिमिटेड की हकीकत है।

 

वो हकीकत जो बताती है कि इस देश में कागज़ कितना ताकतवर है और ज़मीन पर सच्चाई कितनी बेसहारा। उत्तराखंड प्रादेशिक को-ऑपरेटिव यूनियन के क्षेत्रीय प्रबंधक धीरज कुमार बताते हैं कि खरीफ सत्र 2023–24 में मिल को 4462 कुंतल धान कुटाई के लिए दिया गया था। सरकारी नीति के मुताबिक 67 प्रतिशत रिकवरी के हिसाब से 2989.54 कुंतल चावल सरकारी गोदामों में जमा होना था। लेकिन जमा हुआ सिर्फ 178.20 कुंतल चावल। बाकी 2811.34 कुंतल चावल गायब। और यह सब एक दिन में नहीं हुआ। मिल प्रबंधन को चार-चार बार मोहलत दी गई।

नोटिस गए, तारीखें बढ़ीं, फाइलें घूमती रहीं। सरकारी चावल खुले बाजार में बिकता रहा और सिस्टम आंखें मूंदे बैठा रहा।

 

मामले की गंभीरता देखते हुए यूनियन ने जिलाधिकारी ऊधमसिंहनगर से भौतिक सत्यापन की मांग की।

18 अक्टूबर 2024 को नायब तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम राइस मिल पहुंची। नतीजा? गोदाम पूरी तरह खाली। सिर्फ टूटे चावल, एफआरके (फोर्टिफाइड राइस कर्नेल) और खाली बोरे। यानी जो होना था, वो हो चुका था। गरीबों का चावल बाजार में बदल चुका था, और सरकारी मशीनरी जब मौके पर पहुंची तब, तक लुटिया डूब चुकी थी। जांच के बाद मिल के निदेशक पुरुषोत्तम दास अग्रवाल ने शपथ पत्र दिया कि वे छह महीने में पैसा जमा कर देंगे। इतना ही नहीं उन्होंने जमानत के तौर पर अपने चेक भी दिए। लेकिन कुछ दिन बाद विधिक नोटिस भेजकर कहा गया चेक बिना सहमति बैंक में प्रस्तुत न किए जाएं। मतलब साफ था।

 

बैंक के खाते में पैसा नहीं था। चेक सिर्फ समय खरीदने का हथियार के रूप में दिया गया था। जबकि कुल देनदारी 98 लाख 47 हजार 788 रुपये थी और एक पैसा जमा नहीं हुआ। पुलिस ने मिल के निदेशक पुरुषोत्तम दास अग्रवाल, उनकी पत्नी लक्ष्मी अग्रवाल और लेखाकार राजेंद्र सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। एसएसपी मणिकांत मिश्रा के मुताबिक विस्तृत जांच जारी है।लेकिन सवाल सिर्फ मिल मालिकों तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?चार बार राहत किसने दी? जब अंतिम तिथि तय थी, तब भी ढील क्यों? क्या बिना मिलीभगत इतना बड़ा गबन संभव है?

 

कुल मिलाकर यह सिर्फ 2811 कुंतल चावल का मामला नहीं है। यह उस सिस्टम का आईना है, जहां गरीब राशन न ले पाए तो उसकी गलती, आम आदमी बिजली-पानी का बिल न भरे तो जेल, लेकिन करोड़ों का सरकारी चावल गायब हो जाए, तो पहले मोहलत, फिर मुस्कान, और अंत में एफआईआर। अगर ऐसे मामलों में उदाहरणात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो संदेश साफ जाएगा सिस्टम को ठगा जा सकता है। और गरीब, हमेशा की तरह, सिर्फ लाइन में खड़ा रहेगा। यह मामला रुद्रपुर की है, लेकिन सवाल पूरे देश से पूछे जाने चाहिए।