
रुद्रपुर का वेंडिंग जोन बना ठेलीवालों की मुसीबत — ग्राहकों की कमी से ठप पड़ा कारोबार, अब पलायन की नौबत
गांधी पार्क से हटाकर वेंडिंग जोन में बसाए गए ठेली व्यवसायी अब रोज़ी-रोटी के संकट से जूझ रहे हैं, कई मजदूरी और पलायन की राह पर
रुद्रपुर (उधम सिंह नगर):
जिस रुद्रा वेंडिंग जोन को रुद्रपुर प्रशासन ने ठेली और छोटे दुकानदारों के लिए स्थाई समाधान बताकर बनाया था, अब वही स्थान उनके लिए आर्थिक संकट का कारण बन गया है। गांधी पार्क क्षेत्र से हटाए गए सैकड़ों ठेली व्यवसायी अब अपने कारोबार के ठप पड़ने से निराश हैं। कई दुकानदार वेंडिंग जोन छोड़कर दूसरी जगहों की ओर रुख करने की तैयारी में हैं।
शुरुआत में उम्मीद, अब हताशा
वेंडिंग जोन बनने के बाद शुरुआती दिनों में ठेलीवालों के चेहरों पर उम्मीद की चमक थी। उन्हें लगा कि अब उन्हें रोज़ पुलिसिया कार्रवाई या हटाने के डर से मुक्ति मिल गई है। लेकिन समय के साथ वास्तविकता कुछ और ही साबित हुई।
वेंडिंग जोन शहर के मुख्य बाजार से दूर बना होने के कारण यहां ग्राहक बहुत कम आते हैं। पहले गांधी पार्क के आसपास सैकड़ों लोग रोज़ ठेलियों से खरीदारी करते थे, लेकिन अब नई जगह पर दिनभर बैठने के बाद भी मुश्किल से कुछ ग्राहक ही पहुंचते हैं।
आमदनी शून्य, खर्च बढ़ता जा रहा
छोटे व्यापारियों का कहना है कि यहां दुकान का किराया, बिजली और सामान का खर्च बढ़ता जा रहा है जबकि बिक्री नाममात्र की हो रही है। कई ठेलीवालों ने वेंडिंग जोन में दुकान बसाने के लिए उधार लिया था, जो अब उनके लिए सिरदर्द बन गया है।
ठेली संचालक बताते हैं —
“हमें लगा था कि सरकार ने हमें सम्मान और स्थायित्व दिया है, लेकिन अब ऐसा लगता है जैसे रोज़ी-रोटी छीन ली गई हो। दिनभर दुकान खोलने के बाद भी सौ-दो सौ रुपए की भी बिक्री नहीं होती।
“पहले गांधी पार्क में रोज़ की 700–800 रुपए की बिक्री होती थी। अब कभी-कभी पूरे दिन में 100 रुपए भी नहीं निकलते। किराया, बच्चों की फीस और घर का खर्च सब मुश्किल हो गया है।”
मजदूरी और पलायन की राह पर ठेलीवाले
कारोबार ठप होने से कई ठेली संचालक अब मजदूरी या रिक्शा चलाने जैसे दूसरे कामों की ओर लौट रहे हैं। कुछ ने तो वेंडिंग जोन की दुकानें बंद कर दी हैं, और कुछ रुद्रपुर छोड़कर हल्द्वानी या काशीपुर जैसे शहरों की ओर जाने की सोच रहे हैं।
प्रशासन से पुनर्विचार की मांग
व्यापारियों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि वेंडिंग जोन की स्थिति का पुनर्मूल्यांकन किया जाए। उनका कहना है कि जब तक ग्राहकों की आवाजाही नहीं बढ़ेगी, तब तक कोई भी छोटा व्यापारी यहां जीविका नहीं चला पाएगा।
स्थानीय लोगों का भी मानना है कि वेंडिंग जोन को शहर के अधिक व्यस्त हिस्से में स्थानांतरित किया जाना चाहिए, ताकि व्यापारी और ग्राहक दोनों को सुविधा हो।
निष्कर्ष
रुद्रपुर का रुद्रा वेंडिंग जोन, जो कभी छोटे व्यापारियों के लिए आशा का प्रतीक था, आज उनकी आजीविका पर सवाल बन गया है। अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह योजना अपने मकसद से भटककर “वीरान जोन” बनकर रह जाएगी



