
यूजीसी समता गाइडलाइंस लागू करने की मांग पर “अखिल भारतीय वंचित अधिकार दिवस
देश के संयुक्त छात्र संगठनों द्वारा ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी के बैनर तले 13 फरवरी, 2026 को पूरे देश में यूजीसी समता विनियम आंदोलन के तहत आहूत “अखिल भारतीय वंचित अधिकार दिवस” के अवसर पर बुद्धपार्क हल्द्वानी में कॉलेज कैम्पसो में भेदभाव के खिलाफ यूजीसी गाइडलाइंस को लागू करने की मांग पर विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन किया.
ऐक्टू प्रदेश महामंत्री के के बोरा ने कहा कि, जाति और नस्लीय भेदभाव कोई मनगढ़न्त अवधारणा या बीती बात नहीं हैं। वे हमारे शैक्षणिक संस्थानों और पूरे समाज में रोज़मर्रा की क्रूर सच्चाई हैं। क्या “जातिविहीन समाज” बोल देने भर से रोहित वेमुला और डॉ. पायल तड़वी की संस्थागत हत्या या एंजेल चकमा की नस्लीय हत्याओं के विरुद्ध न्याय मिल जायेगा? जातिगत अत्याचारों के खिलाफ़ संघर्ष, या उस संघर्ष से पैदा हुए ऐसे कानूनी उपाय जो जाति और नस्लीय भेदभाव के खिलाफ़ आवाज़ों को मज़बूत करते हैं, देश को आगे बढ़ाने का काम करते हैं.
भाकपा माले नैनीताल जिला सचिव डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, यूजीसी नियमावली पर जातिवादी ब्राह्मणवादी तत्वों के दवाब में स्टे लगाया गया है. यह सर्वविदित और ऐतिहासिक तथ्य है कि उत्पीड़न और अन्याय के खिलाफ़ बनने वाले हर कानून के खिलाफ समाज के ताकतवर हिस्सों से प्रतिक्रियावादी और उन्मादी प्रतिक्रिया के साथ विरोध किया जाता है। इस मामले में भी वही प्रभावशाली समूह अपने सामाजिक वर्चस्व को बनाये रखने और किसी तरह के संस्थागत दंड से बचे रह कर वंचित तबकों के लिये लाये गये न्यायसंगत समानता के उपायों को अपना व्यक्तिगत उत्पीड़न बता रहे हैं।
पछास के चन्दन ने कहा कि, यूजीसी के अपने आंकड़ों से पता चलता है कि 2019 और 2024 के बीच विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति-आधारित भेदभाव की शिकायतों में 118% की वृद्धि हुई है। जाति-आधारित हिंसा की ये घटनाएँ संस्थागत और सरकारों की अनकही मिलीभगत से कायम जातिवादी व्यवस्था का परिणाम हैं। यूजीसी इक्विटी नियम, शैक्षणिक संस्थानों में गहरे जड़ जमाए जातिगत भेदभाव और अत्याचारों के खिलाफ़ एक देर से उठाया गया लेकिन स्वागत योग्य कदम है।
भीम आर्मी से जिलाध्यक्ष नफीस अहमद खान ने कहा कि, यूजीसी इक्विटी पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगायी गयी रोक न्यायसंगत बराबरी के सिद्धांत को नजरअंदाज करती है. यह रोक मोदी सरकार द्वारा जानबूझकर की गयी लचर पैरवी का परिणाम है.
वक्ताओं ने कहा कि, हम समाज के सभी न्यायपसंद लोगों से अपील करते हैं कि वे इन यूजीसी इक्विटी नियमों का समर्थन करें और काफी विलम्ब से लाये गये सही उपायों को रोकने के लिए जातिगत उन्माद भड़काने वालों की कोशिशों को नाकाम करें। न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की संवैधानिक दृष्टि के लिए खड़े हों।
इस अवसर पर ऐक्टू, भाकपा माले, पछास, आइसा, क्रालोस, भीम आर्मी से जुड़े के के बोरा, डॉ कैलाश पाण्डेय, चंदन, नफीस अहमद खान, आकाश भारती, मुकेश भंडारी, पंकज अंबेडकर, सौरभ चंद्र, रितिक कांत, अनीशेख चंद्र, आदि शामिल रहे.



