चुनाव नहीं तो अफसर पेश हों…नगर पालिका चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन
उत्तराखंड हाईकोर्ट में किच्छा स्थित सिरौलीकलां क्षेत्र में नगर पालिका चुनाव न कराए जाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा कि कोर्ट के आदेश का 16 अप्रैल तक कितना अनुपालन हुआ है और इस मामले में क्या निर्णय लिया गया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट की जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि आदेश के अनुसार निर्णय नहीं लिया गया, तो चुनाव आयोग के सचिव और शहरी विकास विभाग के सचिव को 16 अप्रैल को दोपहर 12 बजे कोर्ट में उपस्थित होना होगा।
याचिका उधम सिंह नगर के किच्छा सिरौलीकलां निवासी मोहम्मद याशीन और अन्य लोगों द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2018 में किच्छा नगर पालिका का विस्तार किया गया था, जिसमें सिरौलीकलां, बंडिया, देवरिया और आजादनगर को शामिल किया गया। उसी वर्ष हुए चुनावों में सिरौलीकलां को वार्ड 18, 19, 20 और आंशिक रूप से वार्ड 17 में शामिल किया गया था, लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया।
कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद क्षेत्र को फिर से नगर पालिका में शामिल किया गया। याचिका में बताया गया है कि पिछले छह वर्षों से सिरौलीकलां नगर पालिका का हिस्सा है और यहां लगभग 5 करोड़ रुपये के विकास कार्य भी किए जा चुके हैं। अब इसे फिर से नगर पालिका से अलग करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं।
स्थानीय निवासियों की मांग है कि सिरौलीकलां को नगर पालिका में ही बनाए रखा जाए और अन्य नगर पालिकाओं की तरह कार्यकाल समाप्त होने के बाद यहां भी जल्द चुनाव कराए जाएं। उनका कहना है कि वर्तमान में प्रशासक द्वारा कार्यभार संभालने के कारण कई जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं।






