19 Oct 2026, Mon

उत्तराखंड की जेलों में घटी कैदियों की भीड़, पांच साल में हालात में बड़ा सुधार

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उत्तराखंड की जेलों में घटी कैदियों की भीड़, पांच साल में हालात में बड़ा सुधारउत्तराखंड की जेलों में घटी कैदियों की भीड़, पांच साल में हालात में बड़ा सुधार

 

उत्तराखंड की जेलों में बीते पांच वर्षों में कैदियों की भीड़ को लेकर बड़ा सुधार देखने को मिला है। वर्ष 2021 में देश की सबसे अधिक ओवरक्राउडेड जेलों में शामिल उत्तराखंड अब इस सूची से बाहर निकलता दिखाई दे रहा है। कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग के अनुसार जेल प्रबंधन, नई बैरकों के निर्माण और बंदियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के चलते जेलों में भीड़ का दबाव लगातार कम हुआ है।

 

वर्ष 2021 में उत्तराखंड की जेलों की कुल क्षमता 3741 बंदियों की थी, जबकि उस समय 6921 कैदी जेलों में बंद थे। यानी क्षमता के मुकाबले लगभग 185 प्रतिशत बंदी जेलों में थे। इसके बाद वर्ष 2022 में 6858 और 2023 में 6885 बंदी दर्ज किए गए। हालांकि 2024 से हालात में सुधार शुरू हुआ और बंदियों की संख्या घटकर 5548 रह गई। उस समय जेलों की क्षमता 3921 थी और भीड़ का स्तर 141 प्रतिशत तक पहुंचा।

 

वर्ष 2025 में राज्य की जेलों की क्षमता 3961 रही, जबकि बंदियों की संख्या घटकर 4912 हो गई। वहीं वर्तमान वर्ष 2026 में जेलों में कुल 4703 बंदी हैं, जो क्षमता के मुकाबले करीब 118 प्रतिशत है। विभाग का दावा है कि पिछले पांच वर्षों में जेलों में भीड़ करीब 66 प्रतिशत तक कम हुई है।

 

डीआईजी जेल दधिराम के मुताबिक राज्य की कई जेलों में नई बैरकें बनाई गई हैं। हरिद्वार जेल में नई बैरकों का निर्माण हुआ है, जबकि देहरादून, हरिद्वार और सितारगंज केंद्रीय कारागार का विस्तार कार्य जारी है। पिथौरागढ़ जिला कारागार का निर्माण पूरा हो चुका है और अल्मोड़ा में नई जिला जेल बनाई जा रही है।

 

 

इसके अलावा अल्प सजा वाले कैदियों की रिहाई, गरीब बंदियों को जमानत दिलाने और “सपोर्ट टू पुअर प्रिजनर्स” योजना लागू करने से भी जेलों में भीड़ कम करने में मदद मिली है। इंडिया जस्टिस रिपोर्ट में भी पहले उत्तराखंड की जेलों को सबसे अधिक भीड़भाड़ वाली जेलों में शामिल किया गया था, लेकिन अब हालात में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।

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