#उत्तराखंड की #सियासत में निजी आरोपों का घमासान, जनहित के मुद्दे पीछे
अंकिता भंडारी प्रकरण के बीच महिला #मंत्रीरेखाआर्य और उनके पति के आरोप-प्रत्यारोप ने बढ़ाई सियासी हलचल; समय और परिस्थितियों को लेकर उठ रहे सवाल
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति इन दिनों जनहित के मुद्दों से अधिक निजी विवादों और आरोप-प्रत्यारोप को लेकर सुर्खियों में है। कभी एक विधायक की पत्नी के आरोपों से सियासी गलियारों में हलचल मची, तो अब प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य और उनके पति #गिरधारीलालसाहू के बीच आरोपों का मामला चर्चा के केंद्र में है। इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नैतिकता, महिला सुरक्षा और जनहित के मुद्दों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच #अंकिताभंडारीप्रकरण एक बार फिर चर्चा में है। अंकिता की माता को पुलिस द्वारा डिटेन किए जाने की घटना के बाद मंत्री रेखा आर्य की ओर से घरेलू विवाद और हिंसा से जुड़े आरोप सार्वजनिक होने के घटनाक्रम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन घटनाओं के बीच किसी राजनीतिक रणनीति या ध्यान भटकाने के उद्देश्य का निष्कर्ष निकालने के लिए ठोस तथ्यों और प्रमाणों की आवश्यकता है।
सवाल यह है कि प्रदेश की राजनीति में #जनसरोकारों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर कितनी चर्चा हो रही है? महिला सुरक्षा, न्याय और जवाबदेही जैसे विषयों पर राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी दिखाई दे रही है? क्या राजनीतिक दल जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दे रहे हैं या आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति ही विमर्श का केंद्र बनती जा रही है?
रेखा आर्य और उनके पति के बीच सामने आए आरोपों की सच्चाई जांच और संबंधित तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकती है। लेकिन इस विवाद के बीच अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय की मांग और जनता के सवालों को पीछे नहीं छूटना चाहिए।
उत्तराखंड की जनता को राजनीतिक तमाशा नहीं, जवाबदेही चाहिए। अंकिता भंडारी को न्याय चाहिए और प्रदेश को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है, जो निजी विवादों से आगे बढ़कर जनहित के मुद्दों पर जवाब दे।




