2 Mar 2026, Mon

रुद्रपुर में बन रही बहुमंजिला इमारत पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक

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नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर शहर में स्थित एक बहुमूल्य सरकारी नजूल भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण और फ्रीहोल्डिंग से जुड़े एक गंभीर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए आज एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है.

 

मुख्य न्यायधीश की खण्डपीठ ने विवादित भूमि पर सभी प्रकार के निर्माण और विकास गतिविधियों को अगली तारीख तक रोकने का निर्देश दिया है. जिससे निजी प्रतिवादियों द्वारा प्रस्तावित सैकड़ों करोड़ रुपये के वाणिज्यिक मॉल परियोजना पर फिलहाल रोक लग गई है.

 

याचिकाकर्ता रुद्रपुर नगर निगम के पूर्व सदस्य रामबाबू ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर इस जनहित याचिका में कई गंभीर आरोप लगाए हैं. जिसमें सरकारी अधिकारियों और निजी हितधारकों के बीच सांठगांठ का दावा किया गया है. मूल संपत्ति, यह मामला रुद्रपुर के राजस्व ग्राम लमारा के खसरा संख्या 2 की लगभग 4.07 एकड़ (16,500 वर्ग मीटर) नजूल भूमि से संबंधित है. याचिका में दावा किया गया है कि यह जमीन मूल रूप से जल निकाय (तालाब/पॉन्ड लैंड) थी.

 

आरोप है कि 1988 में इस भूमि की नीलामी केवल मत्स्य पालन के विकास के लिए दो साल की लीज पर दी गई थी, लेकिन सफल बोलीदाताओं ने न तो लीज स्वीकार की और न ही मछली पालन का कार्य किया. याचिका के अनुसार, बोलीदाताओं/निजी प्रतिवादियों ने बिना किसी वैध पट्टे या लीज समझौते के जमीन पर अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया. बाद में, कथित तौर पर अधिकारियों को गुमराह कर और सांठगांठ करके, अवैध रूप से कब्ज़ा ली गई साथ मे अपने पक्ष में इस नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड करा लिया गया.

 

धोखाधड़ी को छिपाने के लिए, फ्रीहोल्डिंग के दौरान मूल खसरा संख्या 2 (ग्राम लमारा) को बदलकर खसरा संख्या 156 (राजस्व ग्राम रामपुरा) कर दिया गया, जिससे राजस्व रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां पाई गईं. फ्रीहोल्डिंग नीलामी की पुरानी दरों (1988) पर की गई, जबकि यह भूमि वर्तमान में सैकड़ों करोड़ रुपये की है, जिससे राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ.

 

याचिका में बताया गया कि निजी प्रतिवादियों ने फ्री होल्डिंग के बाद निर्माण कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम समझौता (Joint Venture Agreement) किया है. जल्द ही इस सार्वजनिक भूमि पर एक विशाल मॉल का निर्माण शुरू करने वाले थे.

 

बुधवार को मुख्य न्यायधीश जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने मामले की प्राथमिक सामग्री और संलग्न दस्तावेजों (जैसे 10-10-2024 और अन्य तिथियों की समीक्षा करने के बाद विवादित स्थल पर निर्माण पर तत्काल रोक रोक लगा दी है. न्यायालय ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए जिला प्रशासन और नगर निगम सहित सभी प्रतिवादी अधिकारियों को विवादित खसरा संख्या पर किसी भी प्रकार की निर्माण अनुमति, लेआउट मंजूरी या विकास कार्य की अनुमति न देने का निर्देश दिया है. यह रोक मामले के अंतिम निपटारे तक तत्काल प्रभाव से लागू रहेगी.

 

न्यायालय ने राज्य के आवास विभाग, नजूल विभाग, और राजस्व विभाग से इस पूरे प्रकरण पर विस्तृत जवाब मांगा है. इसमें नजूल भूमि को फ्री होल्ड करने की प्रक्रिया में अनियमितताओं, भूमि के मूल स्वरूप (तालाब की भूमि) और राजस्व रिकॉर्ड में किए गए बदलावों पर बिंदुवार स्पष्टीकरण भी मांगा गया है. इसके अलावा खण्डपीठ ने सभी नामित निजी प्रतिवादियों को भी नोटिस जारी किया है. उन्हें अगली सुनवाई की तारीख तक आरोपों का जवाब देने का निर्देश दिया गया है.