
आदेश की अनदेखी?…उपनल प्रकरण में हाईकोर्ट का कड़ा रुख
उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ, हल्द्वानी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान संघ की ओर से दाखिल प्रार्थनापत्र पर विचार करते हुए न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ ने सचिव वित्त और सचिव कार्मिक को मामले में पक्षकार बनाते हुए उन्हें नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से पूर्व में पारित आदेश का अनुपालन न करने के संबंध में जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को तय की गई है।
संघ का कहना है कि पूर्व में खंडपीठ द्वारा उपनल कर्मचारियों के हित में जो आदेश पारित किया गया था, उसका अब तक राज्य सरकार ने पालन नहीं किया है। नवंबर 2025 में हुई सुनवाई के दौरान भी संघ ने अदालत को बताया था कि सरकार आदेश के अनुपालन में असमर्थता जता रही है।
खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि उपनल कर्मचारियों को “समान कार्य, समान वेतन” का लाभ दिया जाए, उनके वेतन पर जीएसटी की कटौती न की जाए और नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। आरोप है कि इसके बावजूद सरकार द्वारा दाखिल हलफनामा अदालत के निर्देशों के अनुरूप नहीं है।
संघ ने अपने प्रार्थनापत्र में मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि हाईकोर्ट के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। संघ का कहना है कि यदि वर्ष 2025 की नियमावली के तहत कार्रवाई नहीं की गई तो कर्मचारी संगठन इस नीति का विरोध करेगा।
इससे पहले संघ की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने “उत्तराखंड उपनल कर्मचारी संघ बनाम आनंद बर्धन, मुख्य सचिव उत्तराखंड” प्रकरण में अवमानना याचिका पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की मांग की थी। फिलहाल, हाईकोर्ट ने सचिव वित्त और सचिव कार्मिक से जवाब तलब किया है। अब 12 मार्च को होने वाली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आएगा।



