1 Mar 2026, Sun

गाय को आवारा छोड़ने पर कितनी सजा कितना जुर्माना लगेगा जान लीजिए

खबर शेयर करें-

गो-तस्करी पर उत्तराखंड में अब 10 साल की जेल, सड़क पर गाय छोड़ी तो 10 हजार जुर्माना!

उत्तराखंड गो सेवा आयोग ने गोवंश की हत्या और तस्करी पर 10 साल की कठोर सजा और पाँच लाख जुर्माना लगाने की सिफारिश की है। आवारा पशु छोड़ने पर जुर्माना ₹10,000 करने का प्रस्ताव।

देहरादून। उत्तराखंड में गोवंश की तस्करी और हत्या को रोकने के लिए अब कड़ा कानून लागू हो सकता है। गुरुवार को पशुधन सभागार में हुई उत्तराखंड गो सेवा आयोग की बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया गया कि गोवंश के प्रति क्रूरता और अपराधों के लिए 10 साल की कठोर कारावास और 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाए। आयोग ने इन अहम प्रस्तावों को लागू करवाने के लिए राज्य सरकार को भेज दिया है।

आयोग अध्यक्ष पं. राजेंद्र अणथ्वाल के नेतृत्व में यह महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जिसमें गो संरक्षण को मजबूत करने के लिए कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। वर्तमान में उत्तराखंड में गो-तस्करी और गो-हत्या के मामलों में अधिकतम तीन साल की सजा और 10 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है, जिसे अब उत्तर प्रदेश की तर्ज पर सख्त किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश ने हाल ही में अपने गोवंश संरक्षण कानून को कड़ा किया है।

 

आवारा पशु छोड़ने पर लगेगा भारी जुर्माना
बैठक में केवल गो-हत्या ही नहीं, बल्कि सड़कों पर आवारा गोवंश छोड़ने वाले पशुपालकों पर भी लगाम कसने का फैसला लिया गया। बोर्ड ने गोवंश को सड़क पर बेसहारा छोड़ने पर जुर्माने की राशि को दो हजार से बढ़ाकर सीधा 10 हजार रुपये करने की सिफारिश की है।
आयोग अध्यक्ष अणथ्वाल ने कहा कि, “लगभग 60 प्रतिशत गोवंश आज सड़कों पर है, जिससे दुर्घटनाएं भी होती हैं। इसलिए हमें सख्त प्रावधान करने की जरूरत है।” उनका यह भी मानना ​​है कि कड़े नियम ही गो संरक्षण को प्रभावी बना सकते हैं। इन सख्त कदमों से पशुपालकों में जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी।

गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने का प्रस्ताव
इन कड़े प्रावधानों के अलावा, एक भावनात्मक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर भी सहमति बनी है। आयोग की बोर्ड बैठक में गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया है। इस प्रस्ताव को अब उत्तराखंड सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

गो सेवा आयोग की यह पहल राज्य में गोवंश की सुरक्षा और संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इन प्रस्तावों पर निर्णय लेकर इन्हें उत्तराखंड गो संरक्षण अधिनियम में शामिल करेगी।