1 Mar 2026, Sun

उत्तराखंड के कर्मचारियों का जल्द होगा नियमितीकरण

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उत्तराखंड में कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर प्रक्रिया जारी है. राज्य सरकार जहां पहले ही संशोधित नियमावली लागू कर चुकी है, तो वहीं अब पूर्व में तय कट ऑफ डेट को बढ़ाए जाने पर भी काम जारी है.

इसी कड़ी में मंत्रिमंडलीय उप समिति के निर्देश पर कर्मचारियों की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि ये पता लग सके कि कट ऑफ डेट बदलने पर कितने कर्मी इसके लाभार्थी होंगे और इसका कितना बोझ वित्त के रूप में सरकार पर आएगा.

कर्मचारियों के नियमितीकरण की कसरत तेज: उत्तराखंड शासन अब राज्य में मौजूद दैनिक वेतन, कार्य प्रभारित, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक और तदर्थ रूप में नियुक्त कार्मिकों की जानकारी जुटाने में लग गया है. इसके लिए सचिव कार्मिक शैलेश बग़ौली ने सभी अधिकारियों को पत्र लिखकर नियत प्रारूप में जानकारी देने के लिए कहा है. दरअसल पूर्व में इन कर्मियों के नियमितीकरण को लेकर निर्णय लिया गया था, जिस पर कैबिनेट में कट ऑफ डेट बढ़ाए जाने का पक्ष कुछ मंत्रियों ने रखा था. इसी के आधार पर एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित हुई थी.

इन कर्मचारियों को किया जाना है नियमित: इससे पहले उत्तराखंड की धामी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए नियमितीकरण को लेकर संशोधित नियमावली लागू कर दी थी. जिसके तहत प्रदेश में 10 साल से नियत तिथि तक काम करने वाले कर्मियों को नियमित किया जाना है. राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय के क्रम में विनियमितीकरण नियमावली-2013 में संशोधन करते हुए दैनिक वेतन, कार्य प्रभारित, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक और तदर्थ रूप में नियुक्त कार्मिकों की संशोधित विनियमितीकरण नियमावली-2025 जारी की थी.

नियमित करने के लिए ये होगी शर्त: शासन ने इस संबंध में अधिसूचना निर्गत की थी. संशोधित नियमावली के अनुसार अन्य शर्तें पूर्ण करने पर दैनिक वेतन, कार्य प्रभारित, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक और तदर्थ रूप से नियुक्त वे कार्मिक विनियमितीकरण हेतु पात्र होंगे, जिन्होंने दिनांक चार दिसंबर 2018 तक इस रूप में कम से कम 10 वर्ष की निरन्तर सेवा उस पद या समकक्ष पद पर पूर्ण कर ली हो.

कट ऑफ डेट पर उप समिति सरकार को देगी राय: हालांकि मंत्रिमंडल के कई सदस्य इस कट ऑफ डेट को 2025 तक बढ़ाना चाहते हैं और अब उप समिति इस पर अपनी राय सरकार को सौंपेगी. इससे पहले उप समिति कर्मियों की विस्तृत जानकारी जुटाने में लग गई है, ताकि इससे सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ की असल स्थिति पता लग सके और तैनात कर्मी की योग्यता और विभाग में पद की स्थिति भी साफ हो.