2 Oct 2026, Fri

भारत-नेपाल मैत्री पुल पर ‘नाम’ को लेकर विवाद, ‘आपत्ति’ पर चढ़ाई गई ‘काली पन्नी’, जानिए मामला

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भारत-नेपाल मैत्री पुल पर ‘नाम’ को लेकर विवाद, ‘आपत्ति’ पर चढ़ाई गई ‘काली पन्नी’, जानिए मामला

 

भारत-नेपाल मैत्री सेतु पर लगाए गए साइनबोर्ड को लेकर विवाद, नेपाल ने पुल के छोर पर भारतीय गांव का नाम लिखने पर जताई कड़ी आपत्ति

पिथौरागढ़: भारत के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला तहसील के छारछुम और नेपाल के दार्चुला जिले के महाकाली नगर पालिका वार्ड 8 असिगड़ा को जोड़ने वाले नवनिर्मित भारत-नेपाल मैत्री सेतु पर लगाए गए साइनबोर्ड को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. पुल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों और कस्टम विभाग के भवनों का निर्माण पूरा होने के बाद ही वाहनों की आवाजाही शुरू होगी, लेकिन भारत-नेपाल बॉर्डर पर काली नदी पर बने इस पुल के स्वागत बोर्ड को लेकर विवाद हो गया है.

पुल पर नेपाल की ओर लगे स्वागत बोर्ड पर लिखा था भारतीय क्षेत्र ‘छारछुम’ का नाम: दरअसल, नेपाल की सीमा में लगाए गए बोर्ड पर भारतीय क्षेत्र के गांव ‘छारछुम’ का नाम लिखे जाने पर नेपाली पक्ष ने आपत्ति जताई. इस बोर्ड पर ‘काली नदी, छारछुम’ लिखा था. आपत्ति के बाद बोर्ड पर लिखे नाम को काली पन्नी से ढक दिया गया है. करीब 32.98 करोड़ रुपए की लागत से बने इस पुल का पूरा खर्च भारत ने उठाया है. जबकि, इसका दूसरा छोर नेपाल में है.

इस मोटर पुल से होंगे कई फायदे: अब तक पिथौरागढ़ से नेपाल जाने के लिए कोई मोटर पुल नहीं होने के कारण लोगों को करीब 200 किलोमीटर दूर बनबसा जाना पड़ता था. इससे समय और खर्च दोनों बढ़ते थे. छारछुम पुल शुरू होने के बाद धारचूला से नेपाल के सीमावर्ती इलाकों तक सड़क संपर्क आसान होगा. पुल से वाहनों की आवाजाही भी हो सकेगी, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

नेपाल की आपत्ति के बाद बोर्ड को काली पन्नी से ढका गया: बता दें कि पिथौरागढ़ के धारचूला में छारछुम के पास काली नदी पर भारत-नेपाल को जोड़ने वाला मोटर पुल बनकर तैयार है, लेकिन इसका संचालन शुरू होने से पहले नेपाल की ओर लगाए गए स्वागत बोर्ड को लेकर विवाद खड़ा हो गया. बोर्ड पर भारतीय क्षेत्र के गांव छारछुम का नाम लिखा था. नेपाल की आपत्ति के बाद बुधवार को इस नाम को काली पन्नी से ढक दिया गया.

नेपाल की जमीन पर भारत के गांव का नाम लिखना ठीक नहीं: नेपाल की ओर लगे वेलकम टू नेपाल बोर्ड पर काली नदी, छारछुम लिखा गया था. नेपाल के स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक दलों ने इस पर आपत्ति जताते हुए बोर्ड पर नेपाली क्षेत्र का नाम लिखने की मांग की. नेपाल का कहना था कि पुल का एक छोर नेपाल में आता है, तो यहां भारत के गांव का नाम लिखना कतई ठीक नहीं है. नेपाल की ओर इस स्थान का पता महाकाली नगर पालिका 8, असिगड़ा (दार्चुला) बताया गया है. मामले की जानकारी नेपाल के परराष्ट्र मंत्रालय (विदेश मंत्रालय) और जिला प्रशासन को भी दी गई.

करीब 32 करोड़ 98 लाख रुपए की लागत तैयार किया हुआ है यह पुल: विवाद बढ़ने के बाद भारतीय पक्ष ने बोर्ड पर लिखे ‘छारछुम’ नाम को ढक दिया. मल्ला छारछुम में काली नदी पर बना यह करीब 110 मीटर लंबा मोटर पुल है. इसका शिलान्यास सितंबर 2022 में हुआ था और निर्माण लागत 32 करोड़ 98 लाख रुपए है. फरवरी 2022 में भारत-नेपाल के बीच महाकाली नदी पर मोटरेबल पुल बनाने का समझौता हुआ था. परियोजना के लिए भारत सरकार ने अनुदान सहायता दी है.

भारत-नेपाल के बीच हैं 10 अंतरराष्ट्रीय झूलापुल: पिथौरागढ़ से नेपाल जाने के लिए अब तक वाहनों को करीब 200 किलोमीटर दूर बनबसा होकर जाना पड़ता था. पुल शुरू होने के बाद धारचूला से नेपाल के सीमावर्ती इलाकों तक सीधा सड़क संपर्क मिलेगा और वाहनों की आवाजाही आसान होगी. इससे समय और खर्च बचने के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. पिथौरागढ़ की नेपाल से करीब 275 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है और जिले में दोनों देशों के बीच आवाजाही के लिए 10 अंतरराष्ट्रीय झूलापुल भी हैं.

“आपत्ति के बाद बोर्ड को काली पन्नी से ढका गया है. इस बोर्ड को जल्द ही हटा दिया जाएगा और बाद में इसके स्थान पर नया बोर्ड लगाया जाएगा.”- हेम पांडेय, एई, लोक निर्माण विभाग

बता दें कि भारत और नेपाल के बीच कनेक्टिविटी और सीमा पार व्यापार को मजबूत करने के लिए बेहद अहम कदम है. साथ ही धारचूला को नेपाल के दारचूला से जोड़ने वाले इस पुल का निर्माण अपने आप में खास है. इस पुल का निर्माण महाकाली नदी पर किया जा रहा है, जो भारत और नेपाल के बीच पारस्परिक संबंधों को मजदूत बनाएगी. वहीं इस पुल की कुल लंबाई 110 मीटर है.