नैनीताल में नंदा-सुनंदा की विदाई, जयकारों से गूंजी सरोवर नगरी

ढोल-नगाड़ों की थाप, छोलिया नर्तकों की प्रस्तुति और मां के जयकारों के बीच श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए.

नैनीताल: मां नंदा-सुनंदा की भव्य शोभायात्रा के साथ नंदा देवी महोत्सव अपने समापन की ओर पहुंच गया. अष्टमी के दिन 19 सितंबर से शुरू हुए महोत्सव के अंतिम दिन नयना देवी मंदिर से मां की डोली नगर भ्रमण पर निकली. हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन और विदाई के लिए उमड़े. ढोल-नगाड़ों और छोलिया नृत्य के बीच पूरा नैनीताल मां के जयकारों से गूंज उठा. देर शाम झील में डोला विसर्जन के साथ मां को कैलाश विदा किया गया.

सरोवर नगरी नैनीताल में आज भक्ति, आस्था और कुमाऊंनी संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला. मां नंदा-सुनंदा की विदाई के लिए निकली भव्य शोभायात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. नयना देवी मंदिर से मां नंदा-सुनंदा की डोली नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई तो पूरा शहर मां के जयकारों से गूंज उठा.
नैनीताल में नंदा-सुनंदा की विदाई
ढोल-नगाड़ों की थाप, छोलिया नर्तकों की प्रस्तुति और मां के जयकारों के बीच श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए. स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी मां के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की. मां नंदा-सुनंदा की शोभायात्रा में नैनीताल के सभी वर्गों की भागीदारी देखने को मिली. महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में यात्रा का हिस्सा बने. पारंपरिक वेशभूषा और छोलिया नृत्य ने शोभायात्रा में कुमाऊं की लोक संस्कृति के रंग भर दिए.
नयना देवी मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा माल रोड होते हुए तल्लीताल पहुंची. इसके बाद वापस मल्लीताल की ओर रवाना हुई. पूरे नगर में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने मां की डोली के दर्शन किए. मां नंदा-सुनंदा को कुमाऊं की आराध्य देवी के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता है.
मान्यता के अनुसार महोत्सव के समापन पर मां की डोली को उनके ससुराल कैलाश के लिए विदा किया जाता है. यही वजह है कि मां की विदाई के मौके पर श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था के साथ भावुकता भी नजर आई. देर शाम मां नंदा-सुनंदा की डोली का झील में विसर्जन किया गया. इसके साथ ही 19 सितंबर से शुरू हुए ऐतिहासिक नंदा देवी महोत्सव का विधिवत समापन हो जाएगा. श्रद्धालुओं ने मां से नैनीताल और पूरे प्रदेश की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की.






