20 Oct 2026, Tue

वन विभाग का मुखिया विवाद: सीनियरिटी दरकिनार, फिर सुर्खियों में आया विभाग

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हाईकोर्ट पहुंचा वन विभाग का मुखिया विवाद: सीनियरिटी दरकिनार, फिर सुर्खियों में आया विभाग

 

 

देहरादून/नैनीताल: उत्तराखंड वन विभाग में शीर्ष पद को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। इस बार मामला प्रमुख वन संरक्षक (HOF) की नियुक्ति से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर सीनियरिटी नियमों की अनदेखी की गई है। सबसे वरिष्ठ IFS अधिकारी बीपी गुप्ता ने इस निर्णय के खिलाफ नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दर्ज कर दी है।

 

1992 बैच के सीनियर अफसर को कर दिया गया पीछे

राज्य सरकार ने हाल ही में हुई DPC बैठक के बाद 1993 बैच के रंजन कुमार मिश्र को विभाग का प्रमुख बनाया है। जबकि उनसे सीनियर 1992 बैच के बीपी गुप्ता विभाग में पहले से कार्यरत हैं और प्रशासन शाखा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसी नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

 

HOF पद पर सीनियरिटी की अनदेखी पहली बार नहीं

वन विभाग में शीर्ष पद को लेकर विवाद नया नहीं है। इससे पहले राजीव भरतरी को HOF पद से हटाकर जूनियर अधिकारी विनोद कुमार को जिम्मेदारी दी गई थी। राजीव भरतरी ने भी यह निर्णय हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और कोर्ट ने उन्हें फिर से HOF बहाल करने का आदेश दिया था।

 

इस बार भी ठीक वैसा ही परिदृश्य बनता दिख रहा है, जहां वरिष्ठ अधिकारी को जूनियर के पक्ष में हटाया गया है।

 

बीपी गुप्ता हाईकोर्ट पहुंचे, सवाल उठे DPC प्रक्रिया पर

बीपी गुप्ता ने अपने अधिवक्ता अभिजय नेगी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में आरोप है कि सरकार ने सीनियरिटी सिद्धांत का पालन नहीं किया और बिना ठोस आधार के जूनियर अधिकारी को विभाग का मुखिया बना दिया।

 

हाईकोर्ट इस मामले में DPC की पूरी प्रक्रिया, कारण और मिनट्स तलब कर सकता है। हालांकि, यह भी संभावना है कि तकनीकी आधार पर कोर्ट उन्हें CAT जाने का सुझाव दे।

 

वन विभाग में विवादों का पुराना इतिहास

वन विभाग में इससे पहले भी कई बार नियुक्तियों और तबादलों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। कुछ समय पहले अफसर पंकज कुमार ने भी अपने तबादले को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद कोर्ट ने तबादला आदेश पर रोक लगा दी थी।

 

अब एक बार फिर विभाग के भीतर शीर्ष पद को लेकर उठा यह विवाद सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया और पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े कर रहा है।

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