13 Jun 2026, Sat

उत्तराखंड में अंतरराष्ट्रीय रम्माण मेले का भव्य समापन,

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उत्तराखंड में अंतरराष्ट्रीय रम्माण मेले का भव्य समापन, जानिये क्या है इसकी खासियत

 

 

 

चमोली जिले के सलुड़ गांव में अंतरराष्ट्रीय रम्माण’मेले का भव्य समापन हुआ. इस दौरान परंपराओं की गूंज से सलुड़ घाटी भक्तिमय हुई.

 

चमोली(उत्तराखंड): चमोली जिले के जोशीमठ विकासखंड के सीमांत सलुड़-डुंग्रा गांव में विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक धरोहर ‘रम्माण’ उत्सव का समापन हर्षोल्लास और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न हुआ. 14 अप्रैल से 26 अप्रैल तक चले इस 13 दिवसीय ऐतिहासिक मेले में उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला.

 

डोल-दमाऊ की 18 पारंपरिक तालों पर कलाकारों की पौराणिक मुखौटा नृत्य की प्रस्तुति ने हजारों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. यह आयोजन केवल एक मेला नहीं, बल्कि जीवंत लोक परंपरा का ऐसा उत्सव है जिसे UNESCO द्वारा ‘विश्व की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ का दर्जा प्राप्त है.इस उत्सव को आदि गुरु शंकराचार्य की परंपरा से भी जोड़ा जाता है, जो प्रकृति और मानव के गहरे संबंध को दर्शाता है.

 

अंतरराष्ट्रीय रम्माण मेले का भव्य समापन

 

पौराणिक झलकियों ने रचा देवयुग का माहौल: मेले के मुख्य आकर्षण ‘मुखौटा नृत्य’ में माल्यौण, मोर-मोरियीण, बणिया-बणियाण और माल युद्ध जैसे पारंपरिक प्रसंगों के साथ भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की झांकियों ने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति कराई. ज्योतिर्मठ क्षेत्र के सेलंग गांव में भी रामायण भ्रमण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन पूरे उत्साह के साथ किया गया.

आस्था, संस्कृति और पर्यटन का संगम: अंतिम दिन प्रवासियों और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरी घाटी ‘जय बद्री विशाल’ के उद्घोष से गूंज उठी. यह मेला क्षेत्र की खुशहाली, अच्छी फसल और दैवीय संरक्षण का प्रतीक माना जाता है.

 

रम्माण के किरदार

 

स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस अंतरराष्ट्रीय धरोहर को भविष्य में और अधिक भव्य और आकर्षक स्वरूप देने का संकल्प लिया.

सलुड़ का ‘रम्माण’ मेला न केवल उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करता है, बल्कि यह भारतीय परंपराओं की जीवंत विरासत का वैश्विक मंच भी है. यहां लोक, धर्म और प्रकृति का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है.

 

रम्माण मेले की प्रस्तुति

जानिए क्या है रम्माण: चमोली जिले के पैनखंड क्षेत्र के सलूड डुंग्रा में रम्माण का आयोजन प्रतिवर्ष अप्रैल माह में किया जाता है. रम्माण अपनी विशिष्ट नाट्य शैली और मुखौटों के लिए अगल पहचान लिए हुए है. जिसे देखते हुए यूनेस्को की ओर से साल 2009 में रम्माण को विश्व धरोहर में शामिल किया गया था. रम्माण जहां स्थानीय लोगों की आस्था को संजोए हुए है. वहीं विश्व धरोहर होने के चलते देश और दुनिया के लोगों के लिए यह आयोजन आकर्षण का केंद्र बना रहता है. उत्तराखंड राज्य के निर्माण के बाद वर्ष 2016 में रम्माण को गणतंत्र दिवस की परेड में भी शामिल किया गया था.

 

रम्माण मेले के मुखौटे

विकास की कई घोषणाएं: इस अवसर पर मुख्य अतिथि बदरीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला ने मेले के सौंदर्यीकरण और विकास के लिए ₹3 लाख की घोषणा की. उन्होंने कहा उत्तराखंड के मेले हमारी संस्कृति और पहचान के मजबूत स्तंभ हैं. इन्हें संरक्षित करना सामूहिक जिम्मेदारी है. ब्लॉक प्रमुख अनूप नेगी ने भी ₹2.5 लाख की सहायता देने की घोषणा की. कार्यक्रम में जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पवार, नगर पालिका अध्यक्ष देवेश्वरी साह सहित कई प्रशासनिक और राजनीतिक हस्तियां उपस्थित रहीं.