19 Oct 2026, Mon

भोजन माताओं की हड़ताल, नहीं पकेगा मिड डे मील

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आक्रोश : आज भोजन माताओं की हड़ताल, नहीं पकेगा मिड डे मील

 

 

प्रगतिशील भोजन माता संगठन उत्तराखंड के आह्वान पर आज दो फरवरी को प्रदेशभर की भोजनमाताएं एक दिवसीय हड़ताल पर हैं। भोजन माताओं ने राज्य सरकार पर शोषण का आरोप लगाते हुए मानदेय वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं देने की मांग की है। हड़ताल के चलते कई विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

 

संगठन की महामंत्री रजनी जोशी ने बताया कि वर्तमान में भोजन माताओं से मात्र तीन हजार रुपये मासिक मानदेय पर कार्य लिया जा रहा है, वह भी साल में केवल 11 महीने। उन्हें न तो कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) और न ही भविष्य निधि (ईपीएफ) की सुविधा मिलती है। मातृत्व अवकाश की व्यवस्था न होने से वे असुरक्षित स्थिति में काम करने को मजबूर हैं।

 

उन्होंने चार नए श्रम कानूनों को वापस लेने, न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये लागू करने, भोजन माताओं को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देने, पीएफ, ईएसआई व मातृत्व अवकाश की सुविधा देने, सभी भोजन माताओं को स्थायी करने तथा निकाली गई भोजन माताओं को पुनः कार्य पर रखने की मांग उठाई है।

 

भोजन माताओं के एक दिवसीय हड़ताल के ऐलान से शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है। संगठन की सदस्य तुलसी देवी ने कहा कि भोजन माताओं को प्रतिदिन मात्र 100 रुपये यानी महीने के करीब तीन हजार रुपये मिलते हैं, जो मेहनत के मुकाबले बेहद कम है। वर्षों से मांगें उठाने के बावजूद सुनवाई नहीं हुई, इसलिए आंदोलन तेज करना पड़ा। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो हड़ताल के बाद अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

 

हड़ताल के चलते विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था बाधित न हो, इसके लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद जायसवाल ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विद्यालय में भोजन न बनने की शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

 

भोजन माताओं की हड़ताल ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना की जमीनी हकीकत और श्रमिकों की बदहाल स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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