3 Jun 2026, Wed

चंपावत कथित गैंगरेप मामले में नया मोड़, SIT जांच में साजिश के संकेत

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चंपावत कथित गैंगरेप मामले में नया मोड़, SIT जांच में साजिश के संकेत

 

चंपावत। उत्तराखंड के चंपावत जिले में 16 वर्षीय नाबालिग से कथित गैंगरेप के मामले में पुलिस जांच के बाद बड़ा खुलासा सामने आया है। पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर मामले को सुनियोजित साजिश बताया है। पुलिस के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी जांच में गैंगरेप की पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने बताया कि नाबालिग ने न्यायालय में दिए बयान में कहा है कि उसके साथ कोई दुष्कर्म नहीं हुआ। बयान के अनुसार पूरा घटनाक्रम रिश्ते में चाचा लगने वाले कमल रावत की कथित साजिश का हिस्सा था।

पुलिस के मुताबिक बच्ची को उसके बीमार पिता के इलाज और आर्थिक मदद का लालच देकर इस मामले में शामिल किया गया। जांच में सामने आए तथ्यों ने शुरुआती आरोपों से अलग तस्वीर पेश की है।

SIT जांच के अनुसार नाबालिग गांव सल्ली में आयोजित एक शादी समारोह में अपनी इच्छा से एक परिचित के साथ गई थी। टीम ने स्थानीय लोगों से पूछताछ, CCTV फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा।

जांच में बच्ची की लोकेशन और गतिविधियों को CDR तथा CCTV फुटेज से ट्रेस किया गया। पुलिस का दावा है कि घटना वाले दिन वह कई अलग-अलग स्थानों पर गई थी, जिसकी पुष्टि तकनीकी साक्ष्यों से हुई है।

मेडिकल जांच में भी शरीर पर किसी तरह की बाहरी या अंदरूनी चोट, संघर्ष या जबरदस्ती के स्पष्ट संकेत नहीं मिले। इसी आधार पर पुलिस अब मामले को दूसरे एंगल से भी जांच रही है।

पुलिस के अनुसार कई गवाहों के बयान तकनीकी साक्ष्यों से मेल नहीं खा रहे हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम को लेकर संदेह और गहरा गया है। जांच में यह भी सामने आया कि घटना वाले दिन कमल रावत, पीड़िता और उसकी एक महिला मित्र के बीच लगातार बातचीत और संपर्क हुआ था, जिसे पुलिस अहम कड़ी मान रही है।

वहीं, मामले में नामजद किए गए विनोद सिंह रावत, नवीन सिंह रावत और पूरन सिंह रावत के घटना स्थल पर मौजूद होने के साक्ष्य अब तक नहीं मिले हैं। पुलिस का कहना है कि तकनीकी जांच और गवाहों के बयान उनकी अनुपस्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं।

“बदले की भावना से रची गई साजिश” : एसपी

एसपी रेखा यादव ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 सदस्यीय SIT गठित की गई थी। टीम ने मेडिकल रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, CCTV फुटेज और CDR का गहन विश्लेषण किया।

उन्होंने कहा कि अब तक की जांच में बदले की भावना से साजिश रचे जाने के संकेत मिले हैं। पुलिस के अनुसार कमल रावत और उसकी एक महिला सहयोगी ने कथित तौर पर पूरे घटनाक्रम की योजना बनाई थी।

हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फॉरेंसिक और डिजिटल जांच अभी जारी है। यदि आरोप भ्रामक या मनगढ़ंत पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अफवाहों से बचें और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखें।