TMC चुनाव चिह्न पर घमासान! फ्रिज होगा या किसे मिलेगा ‘जोड़ा फूल’, संविधान विशेषज्ञ ने बताया

आगामी विधानसभा उपचुनावों को देखते हुए और चुनाव आयोग को इस मामले पर अपना अंतिम आदेश पारित करना बाकी है.

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के मालिकाना हक को लेकर पार्टी अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले एक गुट और विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दूसरे गुट के बीच विवाद चल रहा है.

विवादों के बीच पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचार्य ने गुरुवार को कहा कि निर्वाचन आयोग राज्य में आगामी विधानसभा उपचुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ को अस्थायी रूप से फ्रीज कर सकता है और दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिह्न आवंटित कर सकता है.
संविधान विशेषज्ञ की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दोनों गुटों ने पश्चिम बंगाल में दो सीटों पर आगामी विधानसभा उपचुनावों के लिए अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं. नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उक्त सीट से विधायक के रूप में अपना इस्तीफा दे दिया. क्योंकि उन्होंने दो निर्वाचन क्षेत्रों से जीत हासिल की थी. जबकि रेजिनगर में हुमायूं कबीर के इस्तीफे के कारण ऐसा हुआ था. मतदान 6 अक्टूबर को होने वाला है.
आगामी विधानसभा उपचुनावों को देखते हुए और चुनाव आयोग को इस मामले पर अपना अंतिम आदेश पारित करना बाकी है. सवाल यह उठता है कि किस पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के तहत दोनों गुट चुनाव लड़ेंगे.
पिछले हफ्ते मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित निर्वाचन आयोग की पूर्ण बेंच ने इस संबंध में दोनों गुटों द्वारा संपर्क किए जाने के लगभग दो महीने बाद यहां इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (llIDEM) में मामले की सुनवाई की. चुनाव पैनल ने तब दोनों गुटों से नए दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा जो उनके दावों को पुष्ट कर सकें. जिसके अनुसार उन्होंने दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए हैं.
विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद टीएमसी के अंदर विवाद सामने आया. बीजेपी के हाथों पार्टी की हार के बाद से ही ऋतब्रत बनर्जी ममता और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की आलोचना करते रहे हैं. उन्होंने पार्टी की हार के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया. टीएमसी के दोनों गुटों के बीच मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद का जिक्र करते हुए आचार्य ने कहा है कि चुनाव आयोग सभी तथ्यों की जांच करने के बाद अंतिम फैसला लेगा.
उन्होंने मीडिया से कहा, “पश्चिम बंगाल में दो सीटों पर विधानसभा उपचुनाव है. इसलिए मौजूदा स्थिति में जब चुनाव आयोग ने अभी तक अंतिम फैसला नहीं दिया है तो या तो ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को मूल पार्टी चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाएगी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुटों को अलग चुनाव चिह्न आवंटित किया जाएगा.”
आगामी विधानसभा उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग द्वारा चुने जा सकने वाले अन्य संभावित विकल्पों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग पार्टी के चुनाव चिह्न को फ्रीज कर देगा. यह दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिह्न आवंटित करेगा। ये वर्तमान में दो शर्तें हैं जिन्हें चुनाव आयोग मान सकता है.”
उन्होंने कहा, “बिना चिह्न के कोई चुनाव नहीं लड़ सकता है. इसलिए एक चिह्न आवंटित किया जाना चाहिए.” इस बीच चुनाव आयोग के सूत्रों ने ईटीवी भारत को बताया कि दोनों गुटों को इस मामले पर आज चुनाव आयोग मुख्यालय में सुनवाई के लिए बुलाया गया है.
उन्होंने कहा, “दोनों गुटों को चुनाव आयोग मुख्यालय में सुनवाई के लिए बुलाया गया है. ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट पहले चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मिलेगा और फिर ममता के नेतृत्व वाला गुट आयोग से मिलेगा.” सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद चुनाव आयोग एक आदेश पारित कर सकता है.






