15 Jun 2026, Mon

घर संभालने वाली महिलाएं ‘आश्रित’ नहीं…’राष्ट्र निर्माता’ हैं

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घर संभालने वाली महिलाएं ‘आश्रित’ नहीं…’राष्ट्र निर्माता’ हैं: सुप्रीम कोर्ट ने क्यों की यह टिप्पणी

 

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में गृहिणियों को ‘राष्ट्र निर्माता’ माना. कैसे यह फैसला घरेलू महिलाओं को संपत्ति में 50% हक दिलाने की शुरुआत है.

 

भारतीय समाज में अक्सर एक वाक्य बहुत आम सुनने को मिलता है-“मेरी पत्नी कुछ नहीं करती, वो बस हाउसवाइफ है.” लेकिन देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने इस सदियों पुरानी रूढ़िवादी सोच को हमेशा के लिए दफन कर दिया है. अदालत ने साफ कहा है कि घर संभालने वाली महिलाएं ‘आश्रित’ नहीं, बल्कि ‘राष्ट्र निर्माता’ हैं. पंजाब के सड़क दुर्घटना मुआवजे से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की.

 

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक गृहिणी की सेवाओं की न्यूनतम कीमत 30,000 रुपये प्रति माह तय किए जाने के बाद अब यह बहस तेज हो गई है कि देश के विकास, संपत्ति निर्माण और अर्थव्यवस्था में महिलाओं के इस अनकहे योगदान का दायरा वास्तव में कितना बड़ा है. इस रिपोर्ट में यह समझने की कोशिश करते हैं कि महिला का योगदान कैसे है.

 

क्या है मामला

 

घटना: नवंबर 2001 में पंजाब में रेशमा नाम की एक गृहिणी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी.

 

शुरुआती ट्रिब्यूनल: मृतका के पति और तीन बच्चों ने मुआवजे के लिए ‘मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल’ (MACT) का दरवाजा खटखटाया, जहां 2003 में उन्हें एक तय राशि दी गई.

 

हाईकोर्ट का रुख: परिवार ने मुआवजे की रकम बढ़ाने के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की, जहां हाईकोर्ट ने इसे बढ़ाकर ₹8.43 लाख कर दिया.

 

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अंततः यह मामला अपील के जरिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट ने ही सुनवाई के दौरान पंजाब हाईकोर्ट के फैसले में संशोधन किया और एक गृहिणी की सेवाओं के महत्व को ऐतिहासिक मान्यता देते हुए ‘डोमेस्टिक केयर के नुकसान’ के रूप में न्यूनतम ₹30,000 प्रति माह की आय का ऐतिहासिक पैमाना तय किया.

 

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन.के. सिंह की पीठ ने टिप्पणी की है कि एक गृहिणी (होममेकर) का योगदान केवल घर तक सीमित नहीं होता, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी हादसे में गृहिणी की मृत्यु या गंभीर रूप से अक्षम (अपाहिज) होने के कारण परिवार को जो घरेलू देखभाल का नुकसान होता है, उसे मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के तहत मुआवजा तय करते समय अलग से पहचान और महत्व दिया जाना चाहिए.