19 Jun 2026, Fri

जूनियर वकीलों को शुरुआती सालों में गुजारे के लिए मिल सकता है भत्ता! सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों को भेजा नोटिस

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जूनियर वकीलों को शुरुआती सालों में गुजारे के लिए मिल सकता है भत्ता! सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों को भेजा नोटिस

 

सुप्रीम कोर्ट ने पैसों की कमी के कारण प्रतिभाशाली युवा वकीलों के वकालत छोड़ने पर गंभीर चिंता जताई है.

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पैसों की कमी के कारण प्रतिभाशाली युवा वकीलों के वकालत छोड़ने पर चिंता जताई है. कोर्ट ने इस नुकसान को रोकने और संघर्ष कर रहे वकीलों की मदद के लिए एक “युवा वकील व्यावसायिक सहायता कोष” बनाने की बात कही है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर इस संबंध में जवाब मांगा है.

 

यह नोटिस उस याचिका पर जारी किया गया है जिसमें युवा वकीलों को अपने शुरुआती सालों में होने वाली वित्तीय दिक्कतों का जिक्र किया गया था. कोर्ट की पीठ ने कहा कि युवा वकीलों के सामने आने वाली यह वित्तीय चुनौती किसी एक लिंग (महिला या पुरुष) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सबके लिए है और इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए.

 

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने महिला वकीलों के सामने आने वाली दिक्कतों पर भी ध्यान दिया. पीठ ने कहा कि जब महिलाओं को अपने दिन का एक बड़ा हिस्सा कोर्ट परिसर में बिताना पड़ता है तो उनके आराम, प्राइवेसी, सुरक्षा और कामकाज के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं का होना सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है. महिला वकीलों के एक समूह द्वारा दायर की गई इस याचिका में कानूनी क्षेत्र में महिलाओं की पहुंच, समावेशिता और लंबे समय तक टिके रहने से जुड़े मुद्दों को उठाया गया था.

 

पीठ ने कहा कि जब पहली पीढ़ी (जिनके परिवार में पहले कोई वकील न हो) का कोई युवा वकील कोर्ट में कदम रखता है, तो उसे तुरंत बना-बनाया ऑफिस, लाइब्रेरी, बंधे-बंधाए क्लाइंट या कमाई का कोई तय जरिया नहीं मिलता. कोर्ट ने कहा कि शुरुआत के इस दौर में कई जूनियर वकील अपने सीनियरों या कुछ जगहों पर स्थानीय बार एसोसिएशनों द्वारा मिलने वाले मामूली स्टाइपेंड पर निर्भर रहते हैं, जो अक्सर उनके रहने के बुनियादी खर्चों को पूरा करने के लिए भी काफी नहीं होता है.pp